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हमारा जिला हमारी दुनिया


'हमारा जिला हमारो दुनिया एक ऐसा सूत्र है जिसमें 'सबको भाजन-सबको काम' की इच्छा साज स्वभाविक रूप से समाहित है। इस इच्छा में विकेन्द्रीकरण , स्थानिकीकरण , बाजारमुक्ति और विविधीकरण का भी स्वाभाविक समावेशा हैं। अतीत मैं जिस प्रकार भारतीय गांव अपनी बुनियादी ज़रूरतों कै लिए स्वावलंबी थे उसी प्रकार हमें वर्तमान संदर्भ में जिला को स्वावलंबी बनाना होगा। जिला अपनी 8085 प्रतिशत जरूरतों की स्वयं पूरा कर लें इसका विशेष रूप से प्रयास होना चाहिए। अपनी व्यवस्था चलाने के लिए प्रान्त और केंद्र पर जिले की निर्भरता कम होती चली जाए यहीं समाज को स्वलम्ब और सफल बनाने का स्वस्थ तरीका रहेगा। राजसत्ता और उसके सारे तंत्र का जितना सहयोग बन पडे, हमें लेना चाहिए और सहयोग न मिलने की स्थिति में उन पर दबाब बनाने की स्थिति मैं हम आ जाए , ऐसा प्रयास होना चाहिए।

"हमारा जिला हमारी दुनिया' को अवधारणा का व्यावहारिक सूत्र है जिला विकास संगम । इसके अंतर्गत सबसे पहले हमें अपने -अपने जिलों की पूरी जानकारी हासिल करनी होगी। जिले को जनसंख्या, प्राकृतिक संसाधन , जिले में विकास की मद में आने बाली राशि का हिसाब, जिले के राजस्व और आय का ब्यौरा हैं जिले का गेजेटियर, जिले की देशज ज्ञान परंपरा , जिल का अनोखापन क्या है , इन सब बातों की जानकारी एकत्रित करानी होगी। यह सब करने के साथ-साथ अपने जिले को सज्जनशक्ति कहें या स्वदेशी प्रक्षेत्र में काम करने बाले लोग कहें , सबको एकजुट करना आवश्यक है। स्वदेशी प्रक्षेत्र के लोग जैसे - कम पूजी और कम लागत में उत्पादन के ढांचे के चलने वाले लगा; गोरक्षा, गोपालन ,गोसेवा ,गो आधारित कृषि, जैविक कृषि में लगे हुए लोग; प्राकृतिक चिकित्सा आयुर्वेद आदि परंपरागत चिकित्सा में लगे हुए लोग ; जिले में जल ,जंगल ,जमीन , जानवर के क्षेत्र में बिना विदेशी सहायता के काम कर रहे लोग; मातृ शक्ति के क्षेत्र में लगे हुए लोग ; स्थानीय कारीगरी, देशज ज्ञान में लगे हुए लोग; कला, लीकवृत्य आदि सांस्कृतिक गतिविधियों में लगे लोग; जिले की शिक्षा संस्थानों के संचालक, व्यापार मंडल के संचालक, वहां के नौजवानों के संगठन, समाज सुधार के क्षेत्र में लगे संगठन, पर्यावरण सुधार एव रक्षा में लगे लोग; ऐसे संत-महात्मा जिनकी जिले में प्रतिष्ठा हो; इन सबको मिला कर जिले की शक्ति , श्रम, बुद्धि और संसाधन के आधार यर "सबको 'भोजन -सबको काम' का लक्ष्य लेकर जिलं के लोग इकट्ठा हो जाएं तो इसे ही कहा जाएगा 'जिला विकास संगम'। इस आधार पर एकत्रित लोगों के साथ बैठ कर जिल की समस्याओँ ओर विकास पर चर्चा हो जाए तो हम राज़सत्ता से हिसाब मांगने की स्थिति में आ जाएंगे। इसलिए जिले के स्तर पर ही बौद्धिक, रचनात्मक एव आंदोलनकारी ,तीनों तरह की गतिविधिया नियोजित की जानी चाहिए; यहीं ढांचा नीचे गांब तक जाए और ऊपर को तरफ भी पहुचे। विकेन्द्रीकरण , जो भारत की तासीर के अनुरुप है उसी को हमें अपनी संपूर्ण गतिविधियों का आधार बनाना होगा । देश की एकता, देश की अखड़ता बनी रहैं, देश एकजुट होकर दुनियां द्वारा दी जाने वाली चुनौतियां और संकटों का सामना करने की स्थिति में आ सके , इसका रास्ता जिला बिकास संगम से होकर निकलेगा ।