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संवाद, सहमति, सहकार


व्यवस्था परिवर्तन की लड़ाइं में उपरोक्त बिंदु केवल संकेत मात्र हैं। इसके कई अन्य आयाम है जिनसे आप धीरे -धीरे स्वयं को जोड़ सकते हैं। देश में इस समय व्यवस्था परिवर्तन को लक्ष्य बनाकर विभिन्न प्रकार की बौद्धिक, रचनात्मक और आंदोलनकारी गतिविधियों की अंतरधारा बह रही हैं। कई संगठन इन कामो में लगे हुए हैं। आप इन तीनों धाराओं में से किसी एक में या एक से अधिक में अपनी रुचि को देखते हुए सक्रिय हो सकते हैं।

चूंकि व्यवस्था परिवर्तन की लड़ाईं का बुनियादी सूत्र विकेंद्रीकरण है। इसलिए यह कतई आवश्यक नहीं कि यह लडाई किसी ऐसे केंद्रीकृत संगठनीय ढांचे के तहत लड़ी जाय जिसमें पदाधिकारियों की एक लम्वी -चौडी फौज हो और जिसका कोई एकछत्र नेता हो । हमारा लक्ष्य 2006 । व्यवस्था परिवर्त्तन की राह किसी पारंपरिक संगठन से पूरा नहीं हो सकता। सभी अच्छे लोगों को एक संगठन के नीचे काम करने की जरूरत नहीं हैं। जरूरत है बस उन्हें काम करने की , भले ही वे अलग-अलग संगठनों में ही क्यों न हो ।

महत्वपूर्ण यह नहीं कि आप किस बैनर तले काम कर रहे है, महत्वपूर्ण यह है कि आप क्या काम कर रहे हैं। हाई कमांड संस्कृति के तहत काम करते हुए व्यवस्था परिवर्तन के लक्ष्य को कभी भी पूरा नहीं किया जा सकता। लेकिन साथ ही यह भी सच है कि हम असंगठित रहते हुए अपने लक्ष्य की हासिल नहीं कर सकते। इसलिए हमें आज संगठन की नई परिभाषा गढ़नी होगी। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि संगठन का मतलब आदेश और आज्ञापालन न समझा जाए। प्रथम दृष्टि में यह सब मुश्किल लगता है। किंतु, वास्तव में ऐसा नहीं हैं। आपसी संवाद एव समन्वय एक ऐसा सूत्र है जिससे हम अपने काम में तालमेल बिठा सकते हैं। हम स्वतंत्र रहते हुए भी संगठित हो सकते हैं। इसी सूत्र को ध्यान में रखते हुए मैं देश भर की सज्जन शक्ति के बीच कार्य कर रहा हूँ। मेरे इस प्रयास में प्रत्येक भारतवासी की एक भूमिका है। इसलिए आप भी निम्न प्रकार से सहयोग कर सकते हैं।

1. यदि आप अपने कार्यों को सांगठनिक रूप दे चुके है तो कृपया अपने संगठन की प्रकृति और उसके कार्यों की जानकारी हमें दें।।

2..यदि आपके प्रयास अभी व्यक्तिगत स्तर पर ही है, किंतु अब आप सागठनिक स्तर पर योगदान देना चाहते हैं, तो कृपया बताए कि आप की रुचि किस प्रकार के काम में है। व्यवस्था परिवर्तन की लडाई के तीन आयाम है- बौद्धिक, रचनात्मक एव आंदोलनात्मक इनमें से जिस किसी में आपकी रुचि हो, उसी प्रवृति के संगठन से मैं आपको जोड़ने का प्रयास करूँगा ।

3. देश की सज्जन शक्तियों के बीच संवाद स्थापित हो और वे मिलकर व्यवस्था परिवर्तन के लक्ष्य के लिए संघर्ष करें, यह अपने आप में पूरा काम है और इसके लिए भी सांगठनिक प्रयासों की जरूरत पड़ती हैं। यहि आप संवाद एव समन्वय के इस कार्यं में मेरे साथ जुडना चाहते है , तो भी आपका स्वागत हैं। संसाधन जुटाने , संपर्क करने जैसे कई सांगठनिक कार्य है जिसमें आप मेरा सहयोग कर सकते है । मुझे यह जानने की उत्सुकता है कि आप व्यवस्था परिवर्तन की लडाई में कैसे जुडे हैं या कैसे जुड़ना चाहते हैं? देश और समाज के सम्मुख जो समस्याएं है उन्हें आप किस प्रकार देखते हैं। आपके पत्र की मैँ प्रतीक्षा करुगा ।