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संगठनात्मक रचना

राष्ट्रीय कार्यसमिति :31 सदस्य की संचालन समिति 120 सदस्य 151 सदस्य
प्रांतीय कार्यसमिति : 21 सदस्य की संचालन समिति 80 सदस्य 101 सदस्य
101 x 36 प्रांत = 3636 सदस्य)
जिला कार्यसमिति : 11 सदस्य की संचालन समिति + 40 सदस्य 51 सदस्य
(51 x 610 जिला = 31110 सदस्य)
कुल कार्यकर्ता 34897 सदस्य (35 हज़ार सदस्य)

सदस्यों के प्रकार

1. नेता अर्थात नेतृत्व गुणों से संपन्न जो स्वयं कार्य करे और दूसरों को भी कार्य करने की प्रेरणा देने में सफल हो।

2. कार्यकर्त्ता- कार्यकर्ता अर्थात जो हमारी विचारधारा से सहमत होकर संगठन का कार्य करे।

3. समर्थक- समर्थक जो विचारधारा से सहमत हो और सूचना मिलने पर कार्यक्रम में शामिल हो। जो 35 हजार हम जोड़ना चाहते है वे नेता और कार्यकर्ता प्रकार के हों।

संगठन के चार अंग

1. कार्यकर्ता

2. कार्यालय अर्थात संगठन के गतिविधियों का केन्द्र

3. कोष अर्थात संगठन को चलाने का ईधन। संगठन के लिए कोष चाहिए, कोष के लिए संगठन नहीं। गाडी में पेट्रोल टैंक जितना महत्व पेट्रोल का टैंकर मतलब कोष नहीं।

4. कार्यक्रम- कार्यकर्ता और कार्यक्रम की परस्पर पूरक भूमिका। कार्यकर्ताओ के आधार पर कार्यक्रम आयोजन और कार्यक्रम के माध्यम से कार्यकर्ता निर्माण

कार्यक्रमों के प्रकार

1. संगठनात्मक गतिविधियां ा

बैठक

1.पूर्व निर्धारित टीम के सदस्यों का संगठन के विविध पहलुओं पर विचार करने के लिए नियमित अंतराल पर एक साथ बैठना।

2. विषयानुसार संपन्न हो चुके संगठनात्मक व आयोजनात्मक कार्यक्रमों का वृत निवेदन और समीक्षा करना।

3. हो चुकी गलतियों और रह गयी न्यूनता पर विचार करना।

4. भविष्य में गलती दुहरायी न जारी, ऐसा प्रण करना।

5. वर्तमान में चल रहे कार्यक्रमों की समीक्षा करना।

6. आ रही कठिनाइयों को दूर करने का विचार करना।

7. भावी कार्यक्रमों की योजना बनाना।

प्रवास

1. संगठन द्वारा निर्धारित दायित्व की पूर्ति के लिए निर्धारित क्षेत्र में आवश्यकतानुसार नियमित जाना।

2. प्रवासी कार्यकर्ता का आत्मविकास बढ़ता है।

3. अन्य कार्यकर्ताओ को भी संगठन विस्तार के लिए प्रवास की प्रेरणा मिलती है।

4. प्रवासी कार्यकर्ता को जमीनी हकीकत ज्ञात हो जाती है।

5. कार्य में और कार्यकर्ताओ को आने वाली कठिनाई ध्यान में आती है।

प्रशिक्षण

1.अर्थात संगठन के लक्ष्य,स्वरूप और कार्यपद्धति की समान समझ निर्माण करने की विधि।

2. संगठन के विषय में समान समझ होने से कार्य विस्तार में सरलता।

3. नए व्यक्ति को कार्य से जोड़ने में सरलता।

4. संगठन की विशेष पहचान बनने में सरलता।

सान्धिक कार्य (Team Work)

विविध कौशल्य वाले कार्यकर्ताओ का समूह बनाना व कार्यपूर्ति के लिए सभी की कौशलताओ का उपयोग होना। खेल संघ के उदाहरण से समझना आसान, जैसे- क्रिकेट,हाकी,कबड्डी खेल संघ में विविध पहलुओं का दर्शन

2. आंदोलनात्मक आयोजन – धरना, प्रदर्शन, जनसभा, पदयात्रा, RTI, PIL, जनजागरण अभियान आदि ।