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संगठन निर्माण सूत्र


संगठन निर्माण सूत्र
  • हम में से प्रत्येक अपूणांक है, सब मिलकर पूर्णांक बनेंगे।
  • >प्रत्येक व्यक्ति महत्वपूर्ण है, फिर भी अनिवार्य नहीं है।
  • संगठन में पद अधिकार नहीं जिम्मेदारी होती है।
  • प्रत्येक कार्य के लिए कार्यकर्ता चाहिए और प्रत्येक कार्यकर्ता को कार्य चाहिए।
  • अपना कार्य विचार-केन्द्रित हो, व्यक्ति अहित नहीं।>
  • किसी को भी गलतियां करने की स्वतंत्रता है, वहीं गलती दुहराने की नहीं।
  • कार्यक्रम साधन है, साध्य नही।
  • मतभिन्नता हो सकती है, मन-भिन्नता नहीं।
  • अपने प्रति कठोर, परन्तु दूसरों के प्रति उदार व्यवहार होना चाहिए।
  • मत अनेक, फिर भी निर्णय एक
  • पूर्व योजना (Planning in Advance), पूर्ण योजना (Planning in Detail) और अनुवर्तन (Review) कार्यक्रम की सफलता के कारक है।
  • किसी के गुणों की चर्चा सर्वत्र होनी चाहिए,लेकिन उसके दोष केवल यथास्थान ही कहें।
  • युग बदल चुका है अत: अब नये तरीके, नये लड़ाके और नये औजार गढ़ने होंगे
  • संगठन में नया नेतृत्व, साहस, पहल और प्रयोग से उभरेगा।
  • अन्य संगठनों को साथ लेने के लिए संवाद, सहमति और सहकार्य का रास्ता अपनाना होगा।
  • वैश्वीकरण का हथियार केन्द्रीकरण है। इससे उत्पन्न दैत्यों से निपटने के लिए हमें विकेन्द्रीकरण का रास्ता अपनाना होगा
  • संगठन के लिये व्यक्ति-निर्माण के रास्ते के साथ-साथ और भी उपाय अपनाने होंगे। समाज में अच्छी नीयत और अच्छी क्षमता वाली प्रचंड सज्जन-शक्ति क्रियाशील है। उनमें से कुछ को छोड़कर न्यूनतम ढाँचा खड़ा करना है।
  • विश्व भर में जितनी भी महान धार्मिक, सामाजिक, राजनैतिक क्रांतियां हुई है, उनमें समाज के सक्रिय लोगो का 0.01 प्रतिशत से कम रहा। बाकी समाज में जनजागरण के परिणाम से समाज का जागृत, सुप्त या ऐच्छिक या अनैच्छिक समर्थन मिला ।
  • व्यवस्था परिवर्तन के लिए राजनीति में हस्तक्षेप अनिवार्य होगा, इसमें सभी को स्पष्टता होनी चाहिये। हस्तक्षेप का स्वरुप क्या होगा, अभी कहना अधपका परोसना होगा। राजनीति में यह हस्तक्षेप न तो इतनी जल्दी हो कि Premature हो जाए और न इतना कच्चा हो कि कोई Pre-empt कर दे। यह नेतृत्व जरूर ध्यान रखेगा। राजनीति में हस्तक्षेप 'सौ सुनार की या एक लुहार की” होगी यह अभी नहीं कह सकते।
  • संकल्पानुसार, हमारे संगठन का कार्य हमें दशकों में नहीं वर्षो में पूरा करना है। यह संकल्प पूरा करने की समय सीमा कम से कम करना हमारे हाथ में है। इसका रास्ता गुरु गोविन्द सिंह ने बता रखा है- 'सवा लाख से एक लड़ाऊ, तो गुरु गोविन्द कहलाऊं। हमारे भी गुरु गोविंदजी हैं अगर हम भी है सवा लाख से एक लडाऊ बन पाए व उनके साथ "सवा लाख से लड़ाऊं' वाले और भी नेता-कार्यकता जोड़ पाए तो समय सीमा हम न्यूनतम करने में सफल हो सकते है।